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‘महादेव’

दो गज ये है महज,
कदैव न अहंकार कर l
चीत खाल, राख सज,
महादेव का जयकार कर ll1ll

जटा भुजा नीलकंठ,
शीत काल, एक मठ l
डर नहीं अंधेराें से,
शिव नाम याद रख ll2ll

भम भम भोले वो,
नृत्य जिसका ताँड जो l
जिये सदा अकाल जो,
ब्रह्माण्ड जिसके नाम वो ll3ll

भूत काल, शीत काल,
पर्वत-ए-भूचाल जो l
अचल रहे खड़ा सदा,
जिस्म-ए-महाकाल वो ll4ll

खुले जो आँख तिसरी,
धरा घटा ढम ढम हिले l
करे जो कार्य पुण्य का,
शिव साथ हरदम मिले ll5ll

शाँत रहे, एकाँत रहे,
देख के चण्डाल को l
हुए प्रचण्ड शिवा मेरा,

रोक दे वो काल को ll6ll

शीष चन्द्र ,हाथ त्रिशूल ,
सर्व शक्तिशाली जो l
महादेव जिसका नाम है
ब्रहमाण्ड का स्वामी वोll7ll

मैं कौन हूँ ? कोई नहीं,
शिव का रागी हूँ l
न पूछ मुझसे कौन मैं
महादेव का वैरागी हूँ ll8ll

– एक आग
– शशि राठाैर ll

‘महादेव’

दो गज ये है महज,
कदैव न अहंकार कर l
चीत खाल, राख सज,
महादेव का जयकार कर ll1ll

जटा भुजा नीलकंठ,
शीत काल, एक मठ l
डर नहीं अंधेराें से,
शिव नाम याद रख ll2ll

भम भम भोले वो,
नृत्य जिसका ताँड जो l
जिये सदा अकाल जो,
ब्रह्माण्ड जिसके नाम वो ll3ll

भूत काल, शीत काल,
पर्वत-ए-भूचाल जो l
अचल रहे खड़ा सदा,
जिस्म-ए-महाकाल वो ll4ll

खुले जो आँख तिसरी,
धरा घटा ढम ढम हिले l
करे जो कार्य पुण्य का,
शिव साथ हरदम मिले ll5ll

शाँत रहे, एकाँत रहे,
देख के चण्डाल को l
हुए प्रचण्ड शिवा मेरा,

रोक दे वो काल को ll6ll

शीष चन्द्र ,हाथ त्रिशूल ,
सर्व शक्तिशाली जो l
महादेव जिसका नाम है
ब्रहमाण्ड का स्वामी वोll7ll

मैं कौन हूँ ? कोई नहीं,
शिव का रागी हूँ l
न पूछ मुझसे कौन मैं
महादेव का वैरागी हूँ ll8ll

– एक आग
– शशि राठाैर ll